अपनी फरियाद लेकर थानों में बेहिचक आने लगीं महिलाएं

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उत्तर प्रदेश (इटावा)

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मिशन शक्ति का असर

महिला हेल्प डेस्क बनी सहायता का पैगाम

जसवंतनगर।मिशन शक्ति से महिलाओं में आत्मविश्वाश पैदा करने का असर परवान चढ़ने लगा है। इसी वजह  अब यहां थाने में स्थापित महिला हेल्प डेस्क तक बेहिचक आने लगीं हैं। हेल्प डेस्क के जरिए खुलकर अपनी बात कहतीं हैं, शिकायतें पेश करती हैं और जुर्म ज्यादती को बयां करती हैं। वजह यह भी है कि  उनकी बात सुनने के लिए अलग पारदर्शी चैंबर और एक न एक महिला पुलिस कर्मी भी 24 घंटे मौजूद मिलता है।             

मुख्यमंत्री आदित्य नाथ योगी  द्वारा पिछले दिनों  डेढ़ हजार से अधिक थानों में महिला हेल्प डेस्क  खुलवाई गयी थी। जाने इससे  पहले किसी भी थाने में महिला हेल्प डेस्क नहीं होती थी । शिकायत दर्ज कराने पहुंचीं पीड़िताओं से पुरुष पुलिस कर्मियों द्वारा  दुर्व्यवहार किये जाने की ख़बरें भी सामने आती थीं। कम से कम अब ऐसा नहीं है।     महिला हेल्प डेस्क के जरिए अब पीड़ित महिला निःसंकोच थाने में आने लगी हैं। बता दें कि महिला हेल्प डेस्क को  हाईटेक बनाया जारहा है।। ड्यूटी पर तैनात होने वाली महिला पुलिसकर्मियों को प्रशिक्षित भी किया गया है। महिलाओं के साथ चाहे साइबर अपराध हो या फिर अन्य किस्म का अपराध सभी का निवारण तत्काल इस महिला हेल्प डेस्क के जरिए किया जाने लगा है।     

          जसवंतनगर कोतवाली में बनाई गई महिला हेल्प डेस्क पर महिला पुलिसकर्मी पूजा तिवारी, साक्षी, जगन, स्वीटी,मोनी चौहान, ऊषा, आदि महिला तेजतर्रार महिला कांस्टेबल  की ड्यूटी लगाई गई है।जो लगातार आठ-आठ घंटे की बीट के अनुसार नियमित ड्यूटी कर रही हैं।यहां आने वाली प्रत्येक पीड़ित महिला की बात सुनने से पूर्व उन्हें पूर्ण सांत्वना और विश्वाश दिलाती हैं। एक परिजन की तरह पानी चाय व भूखे होने पर भोजन की व्यवस्था करती हैं। इसके बाद  नाम पता नोट कर उस पीड़िता की फरियाद तन्मयता से सुनती हैं ।सारी बातों को नोट भी करतीं हैं।  इस हेल्प डेस्क से चंद दिनों में अब तक दर्जनों समस्याओं का निस्तारण  हो चुका है। सरकार की इस योजना का लाभ महिलायें खूब उठाने लगी हैं।

              थाना कोतवाली प्रभारी रमेश सिंह का कहना है कि महिला हेल्प डेस्क से महिलाओं को काफी ज्यादा राहत मिल रही है। एक शांत और सुरक्षित माहौल में महिलाएं अपनी बात को पुलिस के सामने रखती हैं, जिससे तत्काल समस्या समाधान में उन्हें मदद मिलती है।  महिलाएं अपने को असहाय या असुरक्षित महसूस भी नहीं करतीं।

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