घर के बाहरी बन्द कमरे में मिले दो शव,मालिक और नोकर की हुई हत्या

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उत्तर प्रदेश (इटावा) जसवंतनगर। क्षेत्रीय गांव में एक नौकर और मालिक के बेटे का शव कमरे में पाया गया जिससे होली के दिन पूरे क्षेत्र में सनसनी फैल गई। एसएसपी सहित अन्य पुलिस अधिकारियों ने घटनास्थल पहुंचकर मौका मुआयना किया और विस्तृत जांच पड़ताल अभी जारी है।

थाना कोतवाली जसवंतनगर के अंतर्गत ग्राम नगला नरिया में सुबह तड़के उस समय सनसनी फैल गई जब अमलेश कुमार के घर में बने बाहरी ओर के कमरे में उनके 21 वर्षीय बेटे गुर्वेश उर्फ मयंक का शव चारपाई पर खून में लथपथ एवं 25 वर्षीय नौकर मुकेश का शव दीवार के सहारे दुपट्टे में खूंटी से बंधा हुआ पाया गया। आस-पास के गांव में खबर आग की तरह फैल गई और जिस घर में घटना घटी थी वहां भारी भीड़ जमा हो गई। सूचना मिलते ही एसएसपी डॉ. बृजेश कुमार सिंह व एसपी सिटी प्रशांत कुमार, सीओ साधु राम, इंस्पेक्टर नवरत्न गौतम भारी पुलिस बल के साथ घटनास्थल पहुंचे और दोनों शवों को पोस्टमार्टम के लिए भिजवाया। इस दौरान घटनास्थल पर फॉरेंसिक टीम ने काफी देर तक नमूने एकत्रित कर गहन जांच-पड़ताल की है। बाद में उप जिलाधिकारी नंद प्रकाश मौर्य ने भी घटनास्थल का मुआयना किया।

बताया गया है कि अमलेश कुमार के घर पर रहने वाला 25 वर्षीय नौकर मुकेश फिरोजाबाद का निवासी था वह पिछले साल से उनके यहां घरेलू काम करता था। कई दिनों से वे वह अपने पास एक छोटी कुल्हाड़ी रख कर सोता था कुल्हाड़ी के बारे में पूछने पर वह कहता था कि मुझे रात को डर लगता है। उसी कमरे में अमलेश का छोटा बेटा 21 वर्षीय गुर्वेश उर्फ मयंक सोया हुआ था। सुबह 5.30 बजे के आसपास गैलरी की तरफ कमरे की खिड़की खुली थी। नौकर मुकेश को गाय भैंस का चारा डालने के लिए आवाज दी गई तो अंदर से कोई आवाज नहीं आई। जब अंदर का नजारा देखा तो मयंक चारपाई पर पड़ा था जिसके चेहरे पर चोट के निशान थे तथा चेहरा खून से लथपथ था और नौकर मुकेश कमरे में ही कील में फांसी पर लटका हुआ था। कमरे के अंदर से दोनों दरवाजे बंद थे मेन गेट भी अंदर से बंद था। मयंक के सिर की ओर ही कुल्हाड़ी पड़ी हुई थी शोर मचाने पर मोहल्ले पड़ोस के लोग भी आ गए तो देखा कि दोनों मृत पड़े थे। एसएसपी डॉ बृजेश कुमार सिंह का कहना है कि प्रथम दृष्टया मयंक के सिर पर कुल्हाड़ी से वार किया गया है जबकि नौकर मुकेश के गले में दुपट्टे का फंदा लगा हुआ है पोस्टमार्टम के बाद ही सीन क्लियर हो सकेगा। घर में प्रवेश या निकास कोई भी दरवाजा खुला हुआ नहीं था। परिवार के चार लोग मृतक मयंक के माता पिता और चाचा चाची घर में ही मौजूद थे। परिजनों ने किसी से भी कोई रंजिश नहीं बताई है।

इटावा ब्यूरो चीफ:- सुबोध कुमार पाठक

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