कोविड-19 वैक्सीन लगवाने को बिधूना के समाज सेवी प्रवन्धक उमेश गुप्ता ने किया जागरूक

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बिधूना बाबूराम मोहनलाल पोस्ट ग्रेजुएट महाविद्यालय के प्रवन्धक  श्री उमेश गुप्ता ने कोविड-19 वैक्सीन को लेकर जनसंपर्क  अभियान चलाया। उन्होंने  स्वयं वैक्सीन  लगवाकर अन्य लोगों को वैक्सीन लगवाने के लिए प्रेरित किया और इसके फायदे बताए। 
उमेश गुप्ता ने बताया कि समस्त सरकारी अस्पतालों में 45 वर्ष से ऊपर आयु वर्ग के लोगों को वैक्सीन लगाई जा रही है। इस दौरान उन्होंने  ग्रामीण वासियो को  नि:शुल्क मास्क वितरित कर कोविद -19 से बचाव कैसे करे इसके  उपाय बताए। उन्होंने कहा लोग कोरोना वैक्सीनेशन को लेकर डरे नहीं। वैक्सीन से सम्बंदित अफवाहों पर ध्यान मत दे यह पूरी तरह से सेफ एवं सुरक्षित है  कोविड-19 को लेकर स्वास्थ्य विभाग की गाइडलाइन का पालन करें और अधिक से अधिक संख्या में वैक्सीनेशन जरूर करवाएं।
उमेश गुप्ता इस तरह की  समाज मे फैली भ्रंतियो को समाज से दूर करने का प्रयास करते रहते है 
बताते चले एक मशहूर गीत ‘अपने लिए जिए तो क्या जिए, तू जी ए दिल जमाने के लिए’  समाजसेवी उमेश गुप्ता बाबूराम मोहनलाल महाविद्यालय के प्रवन्धक पर फिट बैठता है। वह गरीब  एवं जरूरतमंदबच्चों को निशुल्क  पढ़ाने के साथ ही उन्हें किताबे तक मुफ्त मैं देते हैं। इतना ही नहीं जल संरक्षण, पर्यावरण, शिक्षा और विलुप्त हो रही पंछियो की प्रजाति  के बचाओ के लिए लोगो को हमेशा जागरूक  करते रहते  रहे हैं। बिधूना  के रहने वाले उमेश गुप्ता  मा शांति देवी  विद्यालयों में बच्चों को लेखन सामग्री निसुल्क पिछले कई सालों से बांट रहे हैं।   जनसेवा कार्य में उनका हमेशा विशेष योगदान रहा और निस्वार्थ सेवा करने के लिए ही उन्होंने 2009 में  बाबूराम मोहनलाल महाविद्यालय की  स्थापना की जिसके माद्यम से  जरूरत मंद गरीब बच्चो को  निषुल्क प्रवेश दिया जिसमे से कई  आज डॉक्टर इंजीनियर के पद पर प्रतिष्टित होकर  देश सेवा कर रहे है  इसके बाद तो  उनके इस अभियान मैं उनके साथ जुड़ने के लिए पूरी एक टीम खड़ी हो गई है।  जिसमे विद्यालय के डायरेक्टर अंकित गुप्ता जी का उन्हें विशेष सहयोग प्राप्त हुआ जिन्होंने सिर्फ बिधूना मैं ही नही  कई जिलों में सामाजिक  सरोकार की मिसाल कायम कर दी है। टीम  युबा लोगो की टोली है जो पर्यावरण, जल संरक्षण और गरीबों के लिए काम करने वाले पचासों कार्यकर्ता उनसे प्रेरणा लेकर जुड़े हुए है टीम कहीं श्रमदान से सड़क तो कहीं बच्चों को प्रोत्साहित करने वाले कार्यक्रमों का संचालन कर रही है। उमेश गुप्ता जी एक मध्यम वर्गीय किसान के घर  पैदा हुए। तमाम कठिनाइयों में रहकर उनकी मां ने पढ़ाया-लिखाया।  उनकी रुचि बचपन से ही नौकरी में न रहकर समाज हित के कार्यो मैं रही। शिक्षा के दौरान उन्होंने गुरुजनों से सुना था कि जल ही जीवन है। ऐसे में जल को संरक्षित किया जाना जरूरी समझा। बिधूना नगर क्षेत्र और आसपास के इलाकों में नल की टोटियों से गिर रहे पानी को देख द्रवित हो उठे और नगर तथा गांवों में नल की टोटी एवं नल लगाने का काम शुरू कर दिया।  बताते चले इन सबकी प्रेरणा उन्हें अपने पिता बाबूराम जी से मिली जिन्होंने   जनपद के कई  नगरों मैं  पानी पीने के नल प्याऊ स्थापित कराए फिर तो तो ये करवा चलता ही गया ।इसी तरह गौरैया संरक्षण, छोटे विद्यालयों में पीने के स्वच्छ पानी के लिए आरओ मशीन लगाने के साथ ही अपनी टीम के माध्यम से कई प्राथमिक विद्यालयों में पंखे लगवाए। उमेश गुप्ता जी पिछले 10 वर्षी से लगातार कंबल वितरण का कार्य जरूरत मंदो को हर वर्ष देकर उनका आशीर्वाद पाते है  उनकी नि:स्वार्थ सामाजिक सेवाओं को देखते हुए    कई सामाजिक एवं शैक्षणिक संथाओ  द्वारा प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया है।  उमेश गुप्ता ऐसे सरोकारों से जुड़कर वृक्ष लगाओ, जल संरक्षण और गौरैया बचाओ जैसे अभियान के लिए मेहनत कर रहे हैं। नगर के प्रबुद्ध लोग बताते है  कि बिधूना क्षेत्र में रचनात्मक कार्यों के लिए उमेश गुप्ता जी की अलग पहचान है। वह निरंतर समाज सेवा और राष्ट्र सेवा के मामले में अच्छा और प्रशंसनीय कार्य कर रहे हैं।

I think all aspiring and professional writers out there will agree when I say that ‘We are never fully satisfied with our work. We always feel that we can do better and that our best piece is yet to be written’.
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