जिम्मेदारों की उदासीनता से बेमतलब बने है अस्पताल, कहीं पर नहीं है डॉक्टर तो कहीं पर है संसाधनों का अभाव

IndiaBelieveNews
Image Credit: IndiaBelieveNews

तंबौर/रायबरेली/उत्तरप्रदेश

जिम्मेदारों की उदासीनता से बेमतलब बने है अस्पताल, कहीं पर नहीं है डॉक्टर तो कहीं पर है संसाधनों का अभाव

सरकारी अस्पताल में मरीजों के इलाज से संबंधित सभी सुविधाएं निशुल्क होने के बाद भी अस्पताल परिसर के आस-पास ही सबसे ज्यादा मेडिकल स्टोर, एक्स-रे, ब्लड बैंक आदि के निजी संस्थान हैं। इन निजी संस्थानों में सुबह से शाम तक मरीजों की भीड़ भी दिखाई देती है। यदि सरकार के दावे के मुताबिक मुफ्त की सभी सुविधाएं मरीजों को मिल रही हैं, तो निजी संस्थानों में मरीज क्यों जा रहे हैं?

सीएमओ साहब जरा ध्यान दे


व्यवस्थाएं वेंटीलेटर पर, कैसे हो इलाज

*ब्लड प्रेशर मापने जैसी मशीन तक नही होने की बात करते है चिकित्सक कैसे हो इलाज भटक रहे मरीज

 जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य व्यवस्था बदहाल है। तंबौर क्षेत्र के लोगों को स्वास्थ्य सुविधा मुहैया कराने के लिए बनाए गए अस्पतालों के भवन ही नहीं पूरी व्यवस्था वेंटीलेटर पर है। जिससे लोगों को इलाज की सुविधा नहीं मिल पा रही है। ऐसे में मजबूर होकर लोग झोलाछाप डॉक्टरों की शरण ले रहे है जहां पर ठगी का शिकार होने के साथ ही बीमारियों का भी शिकार हो रहे हैं।
अस्पतालों में मरीजों को बेहतर चिकित्सीय सेवाएं देने के लिए शासन द्वारा किए जा रहे प्रयासों को अधिकारी परवान नहीं चढ़ने दे रहे हैं। अनियमित दिनचर्या व असंतुलित खानपान से लोगों में रक्तचाप (ब्लड प्रेशर) की बीमारी बढ़ती जा रही है, आश्चर्यस की बात है कि एक और जहा  भारत के प्रधानमंत्री  गरीब और बीमारों  के इलाज के लिए प्रधानमंत्री  आयुष्मान योजना जैसी   जरूरी योजनाएं चला रहे है वही पीएचसी  तंबौर प्राथमिक चिकित्सालय  में   ब्लड प्रेशर मापने के लिए मशीन ही नहीं है।या मशीन खराब है ये कह कर मरीजो को इधर उधर प्राइवेट अस्पतालों मैं जाने को मजबूर होना पड़ता है ब्लड प्रेशर जांच के लिए मरीजों को भटकना पड़ता है।  स्वयं चिकित्सक पर्चे पे लिख कर दे रहे है कि मशीन 20 दिनों से खराब है तो प्रश्न ये उठता है कि ये जिमेदारी मरीज की है जबकि सरकार करोङो रुपये का बजट उपकरणों के लिए पास करती है उस बजट का इस्तेमाल क्या कागजो पर हो रहा है चिकित्सक बीपी मापने के लिए मरीज को इमरजेंसी भेजकर पल्ला झाड़ लेते हैं। ऐसे में यहां आने वाले मरीजों का दर्द और बढ़ जाता है।  
 इसी तरह चक्कर आने से परेशान 55 वर्षीय लुबकुश वर्मा जब स्वास्थ केंद्र गए तो   बताया कि डॉक्टर बीपी मशीन न होने की बात कहकर मना कर देते हैं। और कहते है कि मशीन तो है लेकिन खराब पड़ी है और मजबूरी बस मरीज को प्राइवेट हॉस्पिटल जाना पड़ता है  सूत्रों की मानें तो कुछ चिकित्सकों के पास मशीन तो है, लेकिन वह उसे निकालते नहीं हैं। या घर पर इस्तेमाल करने के लिए ले जाते है

I think all aspiring and professional writers out there will agree when I say that ‘We are never fully satisfied with our work. We always feel that we can do better and that our best piece is yet to be written’.
View all posts

Leave a Reply