सहकारी संघ व समितियों के सचिवों का वेतन सालों के हिसाब से लटका

IndiaBelieveNews
Image Credit: IndiaBelieveNews

उत्तर प्रदेश(इटावा):- जसवंतनगर। सहकारी संघ व समितियों के सचिवों का वेतन सालों के हिसाब से लटक गया है क्योंकि सहकारी संघ व समितियों के जनपद भर में 50 से अधिक खरीद केंद्र बनाए गए थे जिनका कमीशन व भाड़ा पीसीएफ द्वारा 2014 से अब तक नहीं दिया गया है। यही कारण है कि सहकारी सचिवों के परिवार भुखमरी के कगार पर पहुंच रहे हैं।

यह बात उत्तर प्रदेश संयुक्त सहकारी समिति कर्मचारी संघ के प्रांतीय अध्यक्ष नवनाथ पांडे ने यहां हैंवरा स्थित सहकारी संघ पर आयोजित एक बैठक में कही। उन्होंने कहा कि क्रय केंद्र के पास खरीद-फरोख्त के दौरान कमीशन के रूप में प्राप्त होने वाली आय से ही कर्मचारियों का भुगतान हो पा रहा है एवं यह काम सिर्फ धान व गेहूं सीजन पर ही चलता है। और अधिकांश संघ व समितियों हालत बहुत खराब हो गई है। इन कर्मचारियों को समिति के व्यवसाय से प्राप्त मार्जिन जैसे ब्याज वसूली का 28% एवं उर्वरक व्यवसाय का ढाई प्रतिशत कमीशन से वेतन भुगतान की व्यवस्था की जाती है और इस समय तो कोरोना महामारी के कारण पैक्स समितियों का व्यवसाय बिल्कुल बंद हो गया है। गेहूं खरीद भी प्रभावित होने की संभावना है इसलिए आज की बैठक में सरकार से मांग की गई है कि इस संकट की घड़ी में सरकार फंड की व्यवस्था करे और कम से कम 50 लाख का बीमा भी सरकारी कर्मचारियों को उपलब्ध कराए। इस दौरान तमाम सचिवों ने खाद्य वितरण में अंगूठा नहीं लगने, बुजुर्ग बीमार ना आने, नेट प्रॉब्लम होने की तमाम समस्याएं बताईं और पीओएस सिस्टम को बंद करने की बात कही है। इस दौरान लगभग सैकड़ा भर कर्मचारियों को संघ की सदस्यता भी ग्रहण कराई गई। इस मौके पर प्रांतीय महामंत्री अशोक अवस्थी, प्रांतीय कोषाध्यक्ष सुदामा लाल पांडे ने भी संबोधित किया तथा जिला अध्यक्ष राकेश यादव, कोषाध्यक्ष शिवपाल यादव, रामवीर सिंह, सहकारी पर्यवेक्षक बृजेंद्र सिंह यादव, सहकारी सचिव प्रियंका यादव, नीलम यादव, संध्या, हनुमंत, आलोक कुमार, अवधेश कुमार, क्षेत्रपाल सिंह, सतीश यादव, प्रशांत, विवेक, आनंद, आशीष, अवनीश, देवेंद्र इत्यादि मौजूद रहे।

I think all aspiring and professional writers out there will agree when I say that ‘We are never fully satisfied with our work. We always feel that we can do better and that our best piece is yet to be written’.
View all posts

Leave a Reply