केस्थ ग्राम पंचायत के मजरे में गंदगी का दूसरा नाम है झीला

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उत्तर प्रदेश (इटावा)

गांव में न कोई सचिव आया और ना कोई सफाई कर्मी

स्वच्छता अभियान खर्च किया जा रहा है ग्रामीणों को नहीं मालूम

जसवंतनगर। क्षेत्र के ग्राम झीला में अभी तक स्वच्छता अभियान के दर्शन नहीं हुए हैं ग्रामीणों की मानें तो उन्हें नहीं मालूम कि स्वच्छता अभियान पर सरकार खर्च कर रही है। इस गांव में कभी सफाई कर्मी ना आने की भी बात जानकारी में आई है। दो वर्ष पूर्व बने शौचालय ध्वस्त हो चुके हैं।

इस गांव के ग्रामीण किस तरह नारकीय जीवन व्यतीत कर रहे हैं यह देखने व सुनने वाला कोई नहीं है ग्रामीणों का कहना था कि न तो कभी यहां कोई सेक्रेटरी आया ना कोई अधिकारी आया। कभी कभार हम लोग प्रधान से अपना दुखड़ा रोने जाते हैं वह केवल टरका देते हैं। गांव का हैंडपंप लगभग 5 वर्ष से खराब पड़ा है। गांव के खरंजे पर जलभराव है उसके निकास की कभी कोई व्यवस्था नहीं की गई है जबकि ग्रामीणों को उसी गंदे पानी में होकर आना जाना पड़ता है।

ग्रामीणों के अनुसार गांव में जलभराव का कारण पानी का निकास बंद कर दिया जाना रहा है बताते हैं कि पहले गांव का पानी खेतों के किनारे किनारे बंबे में जाकर गिरता था लेकिन बीच में कुछ लोगों ने पानी का निकास बंद कर दिया जिससे गांव में जलभराव हो गया। कई वर्षों से यह जलभराव खरंजे पर चल रहा है और प्रधान या सेक्रेट्री या किसी अन्य अधिकारी ने आकर इस जन समस्या से निपटने के लिए कभी कोई कार्यवाही नहीं की है

गांव में भारी गंदगी है तथा गांव के शौचालय जो अब 2 साल पूर्व ही बनाए बताए गए हैं बुरी तरह क्षतिग्रस्त अवस्था में पड़े हुए हैं ऐसा लगता है के शौचालय सिर्फ शो पीस बनाने के लिए बनाए गए थे इन शौचालयों में भारी घपला किया गया प्रतीत हो रहा है शौचालय के साथ दो गड्ढे खोदे जाने थे लेकिन सिर्फ एक ही गड्ढा यहां हर शौचालय पर खोदा गया है कई शौचालयों में अभी तक सीट भी नहीं रखी गई है तो किसी पर छत नहीं है इस कारण इन शौचालयों का उपयोग कंडा भरने करब रखने या अन्य वस्तुओं के रखने के कमरे के रूप में कर रहे हैं। इस गांव में स्वच्छता अभियान की जैसी ऐसी की तैसी की गई है वैसा उदाहरण शायद ही कहीं मिले। गांव में जानकारी देने वाली महिलाओं में उर्मिला, लक्ष्मी,अनिता,विटानी ,कमला,प्रेमा, मीरा, लक्ष्मी,आदि शामिल हैं। रिपोर्टर:-अनुराग गुप्ता

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