कैलाश मानसरोवर यात्रा में अब सौ किमी से अधिक के पथरी्ले रास्ते पर नही चलना होगा पैदल,

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नैनीताल। विश्व प्रसिद्ध कैलास मानसरोवर यात्रा में अब भक्तों को उच्च हिमालयी क्षेत्र के सौ किलोमीटर पथरीले रास्ते से नहीं गुजरना होगा। कोरोना की वजह से यात्रा जब भी होगी तो भक्त वाहन से भारतीय क्षेत्र की दूरी तय करेंगे। इससे यात्रा की अवधि भी 24 दिन से कम हो जाएगी। यह संभव हुआ है नाभीढांग व जोलीकांग तक सड़क पहुंचने से।
कुमाऊं मंडल विकास निगम 1981 से  कुमाऊं के रास्ते कैलास मानसरोवर यात्रा आयोजित करता है। जबकि 1991 से आदि कैलास यात्रा का आयोजन हो रहा है। अब तक दस हजार से अधिक श्रद्धालु यात्रा कर चुके हैं। महामारी के कारण पिछले साल यात्रा को रद कर दिया था, इस बार भी अब तक यात्रा को लेकर संशय बना है। मानसरोवर यात्रा में 18 दल भेजे जाते हैं। जून से सितंबर तक होने वाली यात्रा दिल्ली से शुरू होकर काठगोदाम, अल्मोड़ा जागेश्वर से पिथौरागढ़ के उच्च हिमालयी क्षेत्र के पड़ावों से गुजरती है। स्वास्थ्य परीक्षण के बाद ही भक्तों को यात्रा की अनुमति दी जाती है।

अब तक उच्च हिमालयी क्षेत्र में सौ किलोमीटर से अधिक की यात्रा पैदल होने की वजह से तमाम भक्त चाहकर भी आवेदन नहीं करते थे मगर अब सड़क बन जाने के बाद यात्रा सुगम होगी। उच्च हिमालयी क्षेत्र में पैदल यात्रा की वजह से यात्रियों के दिक्कतें की वजह से आधे रास्ते से वापस लौटने के मामले भी आते रहे हैं। पिछले साल विदेश मंत्रालय की ओर से निगम से यात्रा रूट मांगा गया था, जिसमें कहा गया कि अब भक्तों को ट्रेकिंग नहीं करनी होगी।
सड़क जाने की वजह से नामिक ट्रेकिंग अब मुश्किल
कुमाऊं मंडल विकास निगम को अब साहसिक पर्यटन में ट्रेकिंग से बहुत आर्थिक लाभ की उम्मीद नहीं है। निगम द्वारा पिंडारी, सुंदरढुंगा, कफनी, नंदा देवी ईस्ट के साथ ही नामिक ग्लेशियर तक ट्रेकिंग आयोजित की जाती थी। कोरोना की वजह से पिछले साल ट्रेकिंग नहीं हो सकी है। इस साल अप्रैल के बाद उम्मीद है। उधर नामिक के निचले गांव  तक सड़क पहुंच गई है।

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