पर्यावरण दिवस सिर्फ एक दिन नहीं बल्कि 365 दिन मनाना चाहिए-याशमीन

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*कार्यक्रम इंचार्ज
सदस्य-गौतम बुद्ध मानव सेवा संस्थान उत्तर प्रदेश

 वन्यजीव एवं पर्यावरण संरक्षण जागरूकता के लिये पिछले कई वर्षों से कार्यरत संस्था * (गौतम बुद्ध मानव सेवा संस्थान)*के कार्यक्रम अधिकारी के पद पर नियुक्त संस्था के माद्यम से  आज विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर कई जगह वृक्षारोपण कार्यक्रम में भाग लेते हुए ,पर्यावरणविद वन्यजीव विशेषज्ञ सदस्य के रूप मैं नियुक्त  याशमीन ने कार्यक्रम अधिकारी के पद पर नियुक्त  उपरोक्त संस्था के माद्यम से  आज विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर कई जगह वृक्षारोपण कार्यक्रम में भाग लेते हुए ,पर्यावरणविद वन्यजीव विशेषज्ञ एवं  ने सभी पर्यावरण प्रेमियों से निवेदन करते हुये कहा है कि, आज हमे किसी भी जगह सिर्फ पौधे को लगाकर छोड़ना नही है बल्कि हमने जो भी पौधे आज लगाये गये है उनको अब बड़ा करने की भी जिम्मेदारी हम सबकी ही है, तभी यह पर्यावरण दिवस भी सार्थक होगा। क्यों कि,धरती पर पेड़ केवल ऑक्सीजन आपूर्ति हेतु ही न लगाएं बल्कि इन्हें अपने परिवार की तरह ही पुत्र या पुत्री की तरह बड़ा भी करे। फिर आप देखेंगे कि आपकी वृद्धावस्था तक यह आपका लाड़ प्यार से बड़ा किया वृक्ष हमेशा आपका साथ भी निभाएगा। धरती पर मौजूद पेड़ पौधे सिर्फ वृक्ष ही नही है बल्कि ये ईश्वर के एक प्रतिरूप भी है जो आपसे सिर्फ प्यार और श्रद्धा ही चाहते है लेकिन बदले में आपको जीवन भर बहुत कुछ देते ही रहते है।
आप सभी को विश्व पर्यावरण दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं।
एक वृक्ष सौ पुत्र समाना

आज विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर  याशमीन   प्रोग्राम इंचार्ज ने संस्था के माद्यम से  वृक्षारोपड़ के कई कार्यक्रम मे भाग लिया  । 
आज विश्व पर्यावरण दिवस पर  विभिन्न परिसरों में 
एक वृक्ष सौ पुत्र समाना अर्थात एक वृक्ष सौ पुत्र के समान है को ध्यान में रखते हुये सहजन, पीपल, बरगद, फायकस, कदम, मोरश्री, आमला, सिल्वर ओक के लगभग सौ पौधे रोपे गये। साथ ही साथ इस अवसर पर प्लास्टिक से बने उत्पादों का किसी भी परिसर में प्रयोग न करने का संकल्प भी लिया गया। याशमीन जी ने इस अवसर पे बताया कि
विश्व पर्यावरण दिवस हर साल 5 जून को मनाया जाता है। इस दिवस को मनाने का मुख्य उद्देश्य है लोगों को पर्यावरण के प्रति जागरूक करना। क्योंकि प्रकृति के बिना मानव जीवन कुछ भी नहीं है। मनुष्य कितना ही लग्जरी जीवन क्यों नहीं जिएं, राहत की सांस, सुकून और शांति वह प्रकृति से जुड़कर ही महसूस करेगा। बदलते दौर में लोगों का प्रकृति के प्रति पे्रम बढ़ा है। लोग अपने घरों की छत पर गार्डनिंग करने लगे हैं, घर पर ही जितनी जगह है उसमें ही पेड़- पौधे लगा रहे हैं, जो फ्रेश ऑक्सीजन  के लिहाज से बेहद जरूरी भी है।विश्व पर्यावरण दिवस 2021 की थीम है पारिस्थितिकी तंत्र बहाली। यानी पृथ्वी को एक बार फिर से अच्छी अवस्था में लाना। इस बार उन गतिविधियों पर जोर दिया जाएगा जिससे दुनिया की पारिस्थितिकी तंत्र को फिर से कायम कर सकें। प्राकृतिक प्रतिक्रियाओं और उभरती हुई हरित तकनीकों पर जोर दिया जाएं।
वो दौर अब आ चुका है कि सभी को पर्यावरण के प्रति अति जागरूक होना चाहिए। उसे जितना कम कष्ट या नुकसान पहुंचाएंगे वह उतना शांत रहेगी। प्राकृतिक चीजों का सम्मान करना जरूरी हो गया है। कूड़ा करके प्रकृति को किसी भी प्रकार से गंदा नहीं करें। साइकिल का इस्तेमाल करें। यह प्रकृति और सेहत दोनों के लिहाज से अच्छा है।पेड़ जीवनदायिनी ऑक्सीजन देते हैं

एक प्रसिद्ध कहावत इस प्रकार है, "कल्पना कीजिए कि अगर पेड़ वाईफाई सिग्नल देते तो हम कितने सारे पेड़ लगाते, शायद हम ग्रह को बचाते। बहुत दुख की बात है कि वे केवल ऑक्सीजन का सृजन करते हैं"। कितना दुखद है कि हम प्रौद्योगिकी के इतने आदी हो गए हैं कि हम अपने पर्यावरण पर होने वाले हानिकारक प्रभावों की अनदेखी करते हैं। न केवल प्रौद्योगिकी का इस्तेमाल प्रकृति को नष्ट कर रहा है बल्कि यह हमें उससे अलग भी कर रहा है।अगर हम वास्तव में जीवित रहना चाहते हैं और अच्छे जीवनयापन करना चाहते हैं तो अधिक से अधिक पेड़ लगाए जाने चाहिए। ऑक्सीजन लेने और कार्बन डाइऑक्साइड को छोड़ने के अलावा पेड़ पर्यावरण से अन्य हानिकारक गैसों को अवशोषित करते हैं जिससे वायु शुद्ध और ताज़ी बनती है। जितने हरे-भरे पेड़ होंगे उतना अधिक ऑक्सीजन का उत्पादन होगा और अधिक विषैली गैसों को यह अवशोषित करेंगे।

प्रदूषण का स्तर इन दिनों बहुत अधिक बढ़ रहा है। इससे लड़ने का एकमात्र तरीका अधिक से अधिक पेड़ लगाना है। उदाहरण के लिए पेड़ों से घिरे क्षेत्र, गांव और जंगल शुद्ध पर्यावरण को बढ़ावा देते हैं। ऐसा इसलिए है क्योंकि ये कम प्रदूषण से प्रभावित क्षेत्र हैं। दूसरी ओर शहरी आवासीय और औद्योगिक क्षेत्रों में खराब प्रदूषण और कम पेड़ों की संख्या के कारण ख़राब गुणवत्ता की वायु है।
वृक्षारोपण का महत्व इतना स्पष्ट है तब भी कुछ ही मुट्ठी भर लोग हैं जो वास्तव में इस गतिविधि में शामिल होने का प्रण लेते हैं। बाकी अपने जीवन में इतने तल्लीन हो चुके हैं कि वे यह नहीं समझते कि बिना पर्याप्त पेड़ों के हम लंबे समय तक जीवित नहीं रह पाएंगे। यह सही समय है जब हमें वृक्षारोपण के महत्व को पहचानना चाहिए और उसकी ओर अपना योगदान देना चाहिए।

आप सभी को विश्व पर्यावरण दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं।

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1 Comments

Hzazlp Hzazlp Saturday, July 2021, 06:33:57

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