विकलांग महिला ने शौचालय और पेन्शन के लिये जगह जगह भटकी नहीं हुई कोई सुनवाई

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उत्तर प्रदेश (इटावा)

जसवंतनगर। विकलांगों की मदद के सरकार तमाम दावे करती है लेकिन यहां धरवार गांव की एक विकलांग महिला को सिर्फ शौचालय और पेंशन हासिल करने के लिए अधिकारियों के चक्कर लगाते हुए कई साल हो गए हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा चलाए जा रहे स्वच्छता अभियान को भी पलीता लगाया जा रहा है और लोग खुले में शौच के लिए जाने को मजबूर हैं।

धरवार गांव के शौचालय विहीन लोगों का कहना है कि कई बार प्रधान से लेकर सचिव से शौचालय की मांग की गई लेकिन हर बार उन्हें शौचालय के लिए अपात्र बताकर चुप करा दिया जाता है। ऐसी ही एक ग्रामीण महिला रीता देवी पत्नी चुन्नीलाल जो पैरों से विकलांग है उसे अपने घरेलू कामकाज में भी दिक्कत होती है लेकिन घर में शौचालय ना होने के कारण उसे मजबूरी में सोच के लिए खेतों में जाना पड़ता है। कई बार प्रधान व सचिव से शौचालय की मांग की है लेकिन उसकी इस मांग पर कोई सुनवाई नहीं की गई। उल्टे प्रधान ने स्वयं उसे अपने निजी पैसे से शौचालय बनवाने की सलाह भी दे डाली। जबकि रीता देवी जैसे तैसे अपने परिवार का गुज़र बसर कर रही है उसका पति भी मजदूरी करता है। उसने बताया कि प्रधान व सचिव द्वारा केवल अपने चहेतों और रिश्वत देने वालों को ही सारी सरकारी योजनाओं का लाभ दिया जा रहा है। उस दुखियारी की तो विकलांग पेंशन भी अभी तक न बन सकी है। सरकार द्वारा विकासखंड जसवंतनगर को खुले में शौच मुक्त का प्रमाण पत्र भले ही दिया जा चुका हो लेकिन जमीनी हकीकत इससे बहुत दूर है। लोग आज भी घर में शौचालय ना होने के कारण खुले में शौच जाने को मजबूर हैं।

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