करोड़ों की लागत से बने रेल्वे अंडर ब्रिज में  गोता लगा रहे बच्चे

IndiaBelieveNews
Image Credit: IndiaBelieveNews

उत्तर प्रदेश (इटावा)  

रतनगढ़ गाँव पर फ्रेट कॉरिडोर रेल लाइन पर बनाया गया है ये ब्रिज    

जसवंतनगर (इटावा)। रेल मंत्रालय ने फ्रेट कॉरिडोर रेलवे लाइन जसवंतनगर में रतन गढ़ व भतौरा गांव होते यहां निकाली है। यह लाइन प्रायः रेलवे की मैन रुट से सटकर निकली है और रेलवे लाइन फोर लाइन सी दिखने लगी है।   इससे जहां जहां रोड क्रॉस रेलवे फाटक पड़े हैं, वहां भारतीय रेलवे ने फाटक समाप्त कर उन पर अंडर ब्रिज या ओवर ब्रिज बनवाये हैं। ऐसा ही एक अंडर ब्रिज जसवंतनगर के कैस्थ मौजा के रतनगढ़ गांव पर बनबाया गया है। यह अंडर ब्रिज जसवंतनगर और सरायभोपात रेलवे स्टेशनों के मध्य है और इस ब्रिज से होकर जसवंतनगर के लोग कचौरा बाई पास पहुंच इटावा और कचौरा होते इटावा और आगरा आना जाना शुरू होना था।      रतन गढ़ का रेलवे फाटक लोगों के लिए शार्ट कट और नगर के लोगों के लिए जाम से बचने का साधन था। 3 वर्ष पूर्व रेलवे के यांत्रिकी और सिविल विभाग ने इस पर 6 करोड़ की लागत से अंडर ब्रिज बनाने का काम शुरू किया और फाटक लगभग दो वर्ष बन्द रखकर अंडर ब्रिज का निर्माण हुआ। फोर लेन पटरियों के नीचे 15 से 20 फुट तक गहराई की गई और लगभग 110 मीटर की एप्रोच के लिए भी अंदर ही अंदर रास्ता बनाकर क्रमशः रतन गढ़ गांव और कचौरा रोड पर रास्ता खोला गया है।   इस अंडर ब्रिज को बने सात आठ महीने हो गया।इस ब्रिज को बनाते समय आर्किटेकट ने यह नही देखा कि पुल से  मात्र 300-400 मीटर पर  भोगनीपुर नहर  बहती है । पानी का लेबल जमीन में अंडर ब्रिज के बराबर होने से अब इस पुल में पटरियों के ठीक नीचे दो दो मीटर तक पानी का सोत आ गया है और  पुल में बराबर नीचे पानी भरा हुआ है। अब यह अंडर ब्रिज पूरी तरह आवागमन के लिए फेल हो गया है। केवल गांव के बच्चों के लिए यह ब्रिज एक स्विमिंग पूल बन गया है।     रेलवे का करोड़ों रुपया भी अफसरों, इंजीनियरों और ठेकेदारों की लापरवाही से इस बने ब्रिज में डूबकर मुंह चिढ़ा रहा। इस संबंध में कॉरिडोर और रेलवे के अफसरों से बात करने की कोशिश की गई, मगर वह कुछ भी बोलने को तैयार नही है। बहरहाल लोग रेलवे फाटक और अंडर ब्रिज दोनों सुबिधाओं से वंचित हो गए है। रिपोर्टर:-वेदव्रत गुप्ता

I think all aspiring and professional writers out there will agree when I say that ‘We are never fully satisfied with our work. We always feel that we can do better and that our best piece is yet to be written’.
View all posts

Leave a Reply