बोनस को मिली हरी झंडी, केंद्रीय रेलवे कर्मचारियों में खुशी

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बरेली। बोनस की मांग को सहमति देकर केंद्र सरकार ने कर्मचारियों को खुशियोंं से भर दिया। बुधवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई मंत्रिमंडल की बैठक में करीब 30 लाख केंद्रीय कर्मचारियों को विजयदशमी से पहले दिवाली का बोनस देने का फैसला किया गया है। सबसे बड़ी बात यह है कि दिवाली का यह बोनस केंद्रीय कर्मचारियों के खाते में डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) के जरिए तुरंत भेज दिया जाएगा। बोनस के लिए सभी रेल यूनियनें लगातार विरोध प्रदर्शन कर रही थी। इसको लेकर ऑल इंडिया रेलवे मेंस फेडरेशन के तहत देश भर में यूनियन व मजदूर संगठन पिछले एक हफ्ते से मांग कर रहे थे। इज्जतनगर रेल मंडल कार्यालय पर ऑल इंडिया रेलवे मेंस फेडरेशन के तहत नरमू ने जुलूस व प्रदर्शन किया था। एआईआरएफ यूनियन कर्मचारी बोनस न मिलने के विरोध में लगातार रेलवे के सामने अपनी बात रख रहे थे। उनका कहना था कि बोनस उनका अधिकार है। बोनस पिछले वित्तीय वर्ष 2019 का है। जोनल सेक्रेटरी व नरमू के केंद्रीय अध्यक्ष बसंत चतुर्वेदी ने बताया कि सरकार के इस निर्णय से हर रेल कर्मचारियों में खुशी की लहर है। पिछले कई दिनो से बोनस न मिलने के विरोध में प्रदर्शन किया जा रहा था। बोनस की मांग को लेकर चल रहे प्रदर्शन के बाद आखिरकार सरकार ने हमारी मांग को पूरा कर दिया है। इसे एआईआरएफ की बड़ी जीत भी बताया है। बोनस की घोषणा होते ही मण्डल कार्यालय पर खुशियां मनाई गई व मिठाइयां बांटकर खुशी का इजहार किया। इस अवसर पर मण्डल अध्य्क्ष सुरेन्द्र सिंह मलिक, मंडल मंत्री कामरान अहमद, मुकेश सक्सेना, सुंदर पाल सिंह, सी.डी अवस्थी, नूतन प्रकाश, सोमनाथ बैनर्जी, रोहित सिंह, रिया सिंह, जगवीर सिंह यादव, आर के पांडेय, नारायणी देवी, राहुल सिंह, विपरेन्द्र ठाकुर, मो. यूनुस, अजयेंद्र व मीडिया प्रभारी आरिफ हुसैन उपस्थित रहे। इसके अलावा भारतीय रेल मजदूर संघ और पूर्वोत्तर रेलवे रेलवे श्रमिक संघ ने वर्चुअल विरोध भी किया था। एक दिन में 8000 के आसपास ट्वीट कर कर्मचारियों ने बोनस की मांग की थी। पूर्वोत्तर रेलवे श्रमिक संघ के सहायक महामंत्री जेएस भदौरिया ने बताया, पूर्वोत्तर रेलवे श्रमिक संघ व भारतीय रेलवे मजदूर संघ तीन अक्टूबर से ही नवीन श्रम संहिता में मजदूर विरोधी प्रावधान व वर्ष 2019-20 का पीएलवी बोनस के भुगतान को लेकर सरकार से वार्ता शुरू कर दी थी। संघ ने अपने अपने स्तर से सरकार को बोनस देने की मांग की थी। वर्चुअल विरोध भी हुआ। बाइक रैली और मसाल जुलूस निकाले गए। 20 अक्टूबर को भारत में एक साथ विरोध हुआ। कर्मचारियों की एकजुटता पर सरकार को बोनस न देने का फैसला बदलना पड़ा। 21 अक्टूबर को कैविनेट की बैठक में बोनस को मंजूरी मिल गई। बोनस अनाउंस होने की खबर सुन कर रेल कर्मचरियोंं में खुशी की लहर है।।

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