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पतंजलि द्वारा बनाई कोरोना की दवाई के प्रचार पर रोक-आयुष मंत्रालय ने पूछा कहाँ हुआ दवा का अध्ययन विस्तृत जानकारी दें..


देहरादून। पतंजलि द्वारा कोरोना वायरस की दवा की लॉन्चिंग के बाद ही विवादों के घेरे में आ गयी हैं। आयुष मंत्रालय ने पतंजलि से कोरोना की दवा से जुड़े विज्ञापनों को बंद करने और इसपर अपने दावे को सार्वजनिक करने से मना किया है। सरकार ने कहा है कि जब तक इसकी विधिवत जांच नहीं हो जाती, तब तक इसके प्रचार-प्रसार पर रोक लगी रहेगी।

आज दोपहर बाबा रामदेव और आचार्य बालकृष्ण ने पतंजलि के अन्य अधिकारियों के साथ पत्रकार वार्ता कर कोरोना की दवा लॉन्च की थी उन्होंने दावा किया था कि 100 मरीजों पर दवा का इस्तेमाल किया गया जिसमें से मरीज 65 प्रतिशत तीन दिन और 100 प्रतिशत सप्ताह भर में कोरोना मुक्त हो गया।लेकिन शाम होते होते आयुष मंत्रालय ने इसके प्रचार प्रसार पर रोक लगाते हुए कहा कि हमें इस बात की जानकारी नहीं है कि किस तरह के वैज्ञानिक अध्ययन के बाद दवा बनाने का दावा किया गया है।मंत्रालय ने इससे जुड़ी पूरी जानकारी मांगी है। सरकार ने साफ शब्दों में कहा है कि बिना मानक की जांच कराए हर तरह के विज्ञापन पर अगले आदेश तक रोक रहेगी।

आयुष मंत्रालय ने कहा कि पतंजलि की कथित दवा, औषधि एवं चमत्कारिक उपचार (आपत्तिजनक विज्ञापन) कानून, 1954 के तहत विनियमित है। पतंजलि से कहा गया है कि वह नमूने का आकार, स्थान, अस्पताल जहां अध्ययन किया गया और आचार समिति की मंजूरी के बारे में विस्तृत जानकारी उपलब्ध कराए।



ब्यूरो रुड़की उतराखंड
 
 
access_time24 Jun 2020 02:06 AM


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